हज़रत अली (अ.) की याद में 19 रमज़ान को सआदतगंज, लखनऊ स्थित मस्जिदे कूफ़ा से निकलने वाले गिलीम के ताबूत का जुलूस कल अक़ीदत और एहतेराम के साथ निकाला गया। जुलूस में शामिल रोज़ेदार हज़रत अली के शबीहे ताबूत की ज़ियारत करने और बोसा लेने के लिए बेक़रार थे। जुलूस से पहले मौलाना ने मजलिस को सम्बोधित करते हुए ईराक़ के नजफ़ शहर स्थित मस्जिदे कूफ़ा में 19 रमज़ान की सुबह नमाज़ पढ़ाते वक़्त हज़रत अली (अ.) के ज़रबत लगने का मंज़र बयान किया तो मस्जिदे कूफ़ा, शबीहे रौज़ए काज़मैन सहित बाहर सड़कों पर खड़े हज़ारों अक़ीदतमंदों की आँखों में आँसू आ गए। नमाज़ के बाद मस्जिदे कूफ़ा से निकला जुलूस अपने निर्धारित मार्गों मंसूरनगर तिराहा, गिरधारी सिंह इण्टर कालेज, अशर्फ़ाबाद, टूरियागंज, नक्ख़ास, अकबकीगेट से होता हुआ पाटानाला पहुँचा। यहाँ ताबूत के इंतेज़ार में पहले से ही बड़ी संख्या में स्त्री-पुरूष अक़ीदतमंद जमा थे। पाटानाला पर जैसे ही जुलूस पहुँचा वैसे ही फ़िज़ा में हाय अली- हाय अली की सदाएँ गूँजने लगीं। रोज़ेदार अज़ादारों ने काफ़ी देर तक सीनेज़नी की, जिसके बाद पुरूषों ने अलम और ताबूत महिलाओं के हवाले कर दिया।समाचार समाप्त..........166
20 अगस्त 2011 - 19:30
समाचार कोड: 261150
हज़रत अली (अ.) की याद में 19 रमज़ान को सआदतगंज, लखनऊ स्थित मस्जिदे कूफ़ा से निकलने वाले गिलीम के ताबूत का जुलूस कल अक़ीदत और एहतेराम के साथ निकाला गया.......